पैसा, पहुंच या मनमानी, भू-माफिया ने बना दी वाराणसी इनक्लेव कॉलोनी

पैसा, पहुंच या मनमानी, भू-माफिया ने बना दी वाराणसी इनक्लेव कॉलोनी

वाराणसी(रणभेरी): प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और वर्तमान राजनीति और विकास का केन्द्र होने के बावजूद वाराणसी में भू-माफियाओं की गुंडगर्दी चरम पर है। नियम-कानून और संविधान की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधकर सो रहे हैं। वीडिए और प्रशासन के नाक के नीचे वाराणसी के मंडुवाडीह मड़ौली में एक बड़ा अवैध कार्य सरेआम हो गया।

मड़ौली में एक भू-माफिया ने पैसे, पहुंच और पैरवी के बदौलत सैकड़ों एकड़ में वाराणसी इनक्लेव नाम की एक बड़ी कॉलोनी बना डाली। न तो इस कॉलोनी के बनाने से पहले कोई ले आउट पास हुआ, न वीडिए के मानको को पूरा किया गया। रेरा के सारे नियम यहां नेस्तनाबूंद कर दिए गए। इस भू-माफिया ने करोड़ो रुपये की स्टाम्प चोरी करके सरकार को ठगने का काम किया है। दरअसल मड़ौली में कमलेश्वर महादेव के मंदिर के सौ मीटर आगे बाइं तरफ एक 14 फीट का रास्ता अंदर जाता है। यह रास्ता वाराणसी इनक्लेव नाम की कॉलोनी का मुख्य मार्ग है। इसके अलावा कहीं से कॉलोनी में घुसने का रास्ता नहीं है। इस रास्ते को देखने के बाद आपको लगेगा शायद यह कोई छोटी कॉलोनी होगी पर जैसे ही आप अंदर जाएंगे आपके पैर तले जमीन खीसक जाएगी। अंदर सैकड़ों एकड़ में प्लाटिंग और भवन निर्माण जारी है। अंदर स्कूल, हॉस्पिटल और कई गोदाम भी हैं। मानक के अनुसार कॉलोनी का मुख्य मार्ग कमसे कम 40 फीट का होना चाहिए। पर यहां नियम-कानून और मानक भी धाराशायी कर दिए गए हैं। कॉलोनी के अंदर रियल स्टेट डेवलेपिंग एक्ट के तहत बनाए गए न तो एक भी मानक हैं और न ही एक भी सुविधाएं। कॉलोनी ने आज भी बिना वीडिए के मानकों और नक्शे के दर्जनों अवैध निर्माण जारी हैं जिनको रोकने और टोकने वाला कोई नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वाराणसी को विकास के उच्च शिखर पर ले जाने का सपना दिखाने वाली सरकार और उनके नुमांइदे मंत्रियों और अधिकारियों को आखिर यह कैसे पता नहीं चला और इतनी बड़ी कॉलोनी बन गई। शहर में अवैध तरीके से इतनी बड़ी कॉलोनी बन गई और वीडिए को इसकी भनक भी नहीं लगी। कहीं न कहीं भारी गोलमाल है।

कॉलोनी के मुख्य रास्ते से नहीं जा सकती दमकल

मड़ौली में बनाई गई इस अवैध कॉलोनी के अंदर सैकड़ों बहुमंजिला बिल्डिंगे बनी हुर्इं हैं। इसके अलावा स्कूल और हॉस्पिटल भी है। कागज के गत्ते और पाइप-टंकी के बड़े गोदाम भी हैं। अगर किसी समय किसी गोदाम या स्कूल में आग भी लग गई तो कॉलोनी में दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंच सकती। क्योकि मुख्य मार्ग केवल 14 फीट का ही है। 

कॉलोनी बनाने के लिए ये है नियम

नियमानुसार निजी भूमि पर कॉलोनी का निर्माण कराने से पहले लाइसेंस लेना पड़ता है। फिर पूरी कॉलोनी की ले आउट तैयार करानी पड़ती है। कॉलोनाइजर को संबंधित नगर पालिका से डायवर्सन के लिए एनओसी लेनी होती है।  कॉलोनाइजर को ट्रांसफार्मर, पानी, सड़क का निर्माण कराना होगा। पार्क के लिए भूमि आरक्षित रखनी होगी। टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग से भी कॉलोनी निर्माण के लिए अनुमति लेनी होगी। एक एकड़ से कम क्षेत्र में कॉलोनी बनाई जा रही है तो पालिका में वर्तमान रेट का 15 प्रतिशत आश्रय शुल्क जमा करना पड़ता है, अगर एक एकड़ से ज्यादा जमीन है तो एयर डिस्टेंस दो किमी के भीतर ईडब्ल्यूएस बनाने के लिए जमीन छोडनी पड़ती है। इसके साथ ही रेरा से अनुमति लेनी होगी और प्रति विस्वा वीडिए को शुल्क चुकानी पड़ती है। यहां इन नियमों को पूरी तरह से खिलवाड़ किया गया है।

  • वीडिए के मानकों की धज्जियां उड़ाकर मड़ौली में बसाई गई एक बृहद अवैध कॉलोनी
  • करोड़ों की स्टाम्प चोरी की बदौलत सरकार को भी लिया ठग 
  • रेरा के नियमों को खुलेआम किया गया ध्वस्त, कॉलोनी में अभी भी जारी है प्लाटों की खरीद-परोख्त
  • मात्र 14 फीट का है सैकड़ों एकड़ में बनाई गई कॉलोनी का मुख्य मार्ग, नहीं पास है लेआउट, सुविधाएं भी नदारद
  • कॉलोनी के अंदर बिना वीडिए के अनुमति और नक्शा के अभी भी जारी है दर्जनों मकानों का निर्माण