नगदी न बन जाये कोरोना का कैरियर, नोटों के सेनेटाइजेशन के बिना संक्रमण रोकने की बात अधूरी!

नगदी न बन जाये कोरोना का कैरियर, नोटों के सेनेटाइजेशन के बिना संक्रमण रोकने की बात अधूरी!

करेंसी नोटों के सेनेटाइजेशन के बिना कोरोना वायरस खत्म करने की बात खोखली
संक्रमित व्यक्ति द्वारा नोटों का लेनदेन हुआ तो हो सकती है दिक्कतें

वाराणसी(रणभेरी): सरकार कोविड-9 संक्रमण रोकने के लिए हर उपाय कर रही है। लॉकडाऊन, सोशल डिस्टेंसिंग, चेहरे को मास्क से ढकने से लेकर हाथों को सेनेटाइजर से साफ करने की सलाह उन कवायदों में से एक है। लोग कोरोना बीमारी से स्वयं ही सचेत हो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सुझाये गए नियमों के पालन में लगे हैं। लोग आपसी दूरी बना रहे हैं। साफ सफाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। वहीं शासन प्रशासन के साथ अर्द्धसैनिक बल भी गली मोहल्लों को सेनेटाइज कर रहे हैं ताकि संक्रमण च्रक बाधित हो। वहीं एक हाथ से दूसरे,तीसरे हाथ तक सफर करने वाले करेंसी नोटों द्वारा संक्रमण का खतरा बना रहता है।

दीजिए ध्यान,रहिये सावधान:

पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों से उड़ती खबरें आ रहीं थीं कि कुछ लोग करेंसी नोटों को वायरस से संक्रमित कर सड़कों पर फेंक दे रहे हैं, इसमें कितनी सच्चाई है पता नहीं। मगर करेंसी नोटों से कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ सकता है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि करेंसी नोट प्रतिदिन सैकड़ो लोगों के हाथों से गुजरता रहता है। उनमें से कोई व्यक्ति अगर संक्रमित हुआ तो उसके द्वारा लेनदेन किया व्यक्ति भी उसका आसानी से शिकार हो सकता है। 

इसी बात को ध्यान में रखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी करेंसी नोटों के लेनदेन पर वायरस के संभावित खतरे पर चिंता जाहिर कर चुका है। वहीं चीन,कोरिया के बारे में भी यह मीडिया रिपोर्ट थी कि वह अपने करोड़ों की करेंसी को सेनेटाइज करने का आदेश दिया था। बीते मार्च में रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया ने एक एडवाइजरी जारी कर कहा था कि खरीददारी के लिए नगद लेने की बजाय डिजिटल पेमेंट के तरीकों को जोर दिया गया था। मगर करेंसी संक्रमण और उसे सेनेटाइज करने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। जबकि नोटों को सेनेटाइज किये बिना संक्रमण रोकने की बात अधूरी होगी।

क्या करें, कैसे बचें?

सामानों की खरीददारी में नोटों का लेन देन आम बात है। मगर वर्तमान हालात को देखते हुए क्रय विक्रय में नगदी का लेन देन कम करना ही संक्रमण रोकने में प्रभावी होगा। क्योंकि नगद लेने देन के बाद बार बार हाथों को धोना,या सेनेटाइज करना सम्भव नहीं लगता। इसलिए खरीददारी में ज्यादा से ज्यादा मोबाइल एप से डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करें, कैश लेस ट्रांजेक्शन होने की वजह से नगदी का हस्तांतरण नहीं होगा तो नोटों द्वारा वायरस संक्रमण से बचा जा सकता है। साथ ही सम्भव हो तो मार्केट से प्राप्त सिक्कों को डेटॉल या सेनेटाइजर युक्त घोल में कुछ देर रखें फिर उसे निकाल कर इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा।

ध्यान दीजिए सरकार, करेंसी पर करिये सेनेटाइज वॉर:

सरकार लॉक डाऊन, सोशल डिस्टेंसिंग पर तो पूरा ध्यान दे रही है। मगर संक्रमण चक्र बाधित करने के लिए जरूरत है। नगदी की बजाय जनता को डिजिटल पेमेंट के लिए और जागरूक करने के साथ नोटों एटीएमो को सेनेटाइज करने की ताकि नगदी लेने देन करना पड़े तो नोट संक्रमण मुक्त रहें। इसके लिए सरकार जोर देकर नोटों को सेनेटाइज करने की प्रक्रिया अविलंब अपनाये वरना सरकार का संक्रमण रोकने के लिए किया गया उपाय पूरी तरह से सफल नहीं कहा जा सकता।
 

लेखक: विनय मौर्या