बनारस का ‘रस’ चूस रहा चाइना, हमसे कमाकर हमारे ही खिलाफ रचता है साजिश

बनारस का ‘रस’ चूस रहा चाइना,  हमसे कमाकर हमारे ही खिलाफ रचता है साजिश

रिपोर्ट: राजीव सेठ/ विक्की मध्यानी

वाराणसी(रणभेरी): अपने सस्ते उत्पादों के बदौलत देश के बाजारों पर कब्जा जमा चुका चीन गलवान सीमा विवाद के बाद एक बार पुन: भारतीयों के निशाने पर है। देश में लम्बे समय से चाइनीज चीजों का बहिष्कार कर स्वदेशी सामानों को इस्तेमाल करने की मांग की जा रही है। कारण यह है कि एक तो चाइना के सामान जल्दी खराब हो जाते हैं, दूसरा चाइनीज उत्पादों की वजह से देशी उद्योग धंधे मंदे होते जा रहें। तीसरा बड़ा कारण है कि चाईना हमारे देश से कमाकर हमारे ही खिलाफ साजिश रचता है। चाइना देश के बाजारों में इस कदर हावी होता जा रहा है कि वर्तमान में हर छोटी बड़ी जरूरत की चीजों को वह सस्ते दामों में मार्केट में उतार देता है। लिहाजा सस्ते के चक्कर में लोग ‘मेड इन चाइना’ सामान खरीद लेते हैं। बात करें वाराणसी  जिले की तो सिर्फ यहां से ही हर महीने करोड़ों रुपयों का कारोबार चाइना करता है। 

इलेक्ट्रॉनिक चाइना को देते टॉनिक :

चौक का दालमंडी इलाका इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक चीजों का हब है। यहां घड़ी,मोबाइल, चार्जर,पेन ड्राइव, मोबाइल की बैटरी,खिलौने,टार्च,ट्राईपॉड मेमोरी कार्ड, विद्युत तार,ब्लूटूथ स्पीकर से लगायत सैकड़ों चीजें चीन निर्मित होती हैं। यहांप्रतिदिन पूर्वांचल और बिहार के हजारों व्यापारी आते हैं। करोड़ों का माल बेचने के लिए ले जाते हैं। लॉक डाऊन के बाद कारोबार थोड़ा मंदा हुआ है। फिश एक्वेरियम,फर्नीचर क्रॉकरी,फूड से चाईना लेता है लूट: मार्केट में आजकल चिप्स पापड़ वगैरह भी चीन निर्मित आ रहें हैं। इसके अलावा फिश एक्वेरियम की जार,जिसमे मछली पालते है।उनका चारा भी मेड इन चाइना आता है।वहीं फर्नीचर के आइटम जैसे गद्दा,पंलग टेबल,डायनिंग टेबल, मेज कम्प्यूटर टेबल तक चायनीज आईटम बिकते हैं। भारतीय घरों में क्रॉकरी के कप प्लेट,मग,जार, से लेकर कई आइटम चाइना के बने आ रहे हैं।

बनारसी साड़ी में चाईना की सेंधमारी:

बनारस की पहचान में से एक बनारसी साड़ी में भी चाईना ने घुसपैठ कर लिया है। यहां स्थानीय रेशम की बजाय अब बहुतों ने चाईनिज रेशम का उपयोग साड़ी बनाने में करने लगे हैं। कारण चाईनिज रेशम जो अमूमन प्लास्टिक का होता है। कुछ बुनकर उसे इस्तेमाल करते हैं। वजह उसका सस्ता होना। यहाँ तक एम्ब्रायडरी मशीनें भी चाईना निर्मित कई जगहों पर देखने को मिलती हैं। ले देकर चाईना की चालाकी यहां भी हावी है।


इलेक्ट्रॉनिक सामानों के व्यापारी अशोक मखीजा कहते हैं कि चाइना भारत के हर प्रोडक्ट में दीमक की तरह घुस चुका है। चूंकि देश में बहुत सारे प्रोडक्ट  पहले से आ गए हैं। जब ये समाप्त होगा तभी इसे हम पुर्ण रुप से बन्द कर पायेंगे।हमारे मन में देश के प्रति निष्ठा समर्पण है।  अगर सरकार चाइना के सामानों का आयात रोक दे तो इसे पुर्ण रुप से बन्द करना और आसान होगा।

युवा काशी बिस्कुट व कन्फैक्शनरी व्यपार मंडल के अध्यक्ष जय निहलानी कहते हैं कि सरकार को चाइना के सामान को प्रतिबंधित कर देना चाहिए। औ? स्थानीय स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना चाहिए। ताकि हमारे देश का पैसा हमारे ही देश में रहे। चाईना हमारे देश से कमाकर हमारे ही देश के खिलाफ रहता है।

इलेक्ट्रॉनिक गुड्स व्यापारी अर्शी खान कहते हैं कि सरकार यहां के लोकल उत्पादों को प्रोत्साहित करे तो बेहतर होता। लोकल चीजों पर टैक्स की मार अधिक रहती है। लिहाजा चायनीज चीजें उससे सस्ती पड़ती हैं। इसलिए लोग चाईनिज आयटम लेते हैं। हमारी कोशिश होती है कि ग्राहकों को स्वदेशी चीजें खरीदने के लिए प्रेरित हों।