लखनऊ से बसों से 303 दिहाड़ी मजदूर पहुंचे, बोले- 550 रुपए दिया किराया

लखनऊ से बसों से 303 दिहाड़ी मजदूर पहुंचे, बोले- 550 रुपए दिया किराया

लखनऊ: लॉकडाउन के चलते दूसरे प्रदेशों में फंसे प्रवासी मजदूरों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए स्पेशल ट्रेन और बसों को चलाया जा रहा हैं। ट्रेन और बसों में सरकार द्वारा किराया माफी के दावों को प्रवासी मजदूरों ने खारिज कर दिया है। 

मजदूरों ने बताया कि लखनऊ के चारबाग स्टेशन से कन्नौज तक की यात्रा के लिए उनसे प्रति व्यक्ति 550 रुपए लिए गए है। महाराष्ट्र में फंसे 303 प्रवासी मजदूरों स्पेशल ट्रेन से लखनऊ पहुंचे। यहां से 12 रोडवेज बसों द्वारा मजदूरों को कन्नौज लाया गया। इन सभी मजदूरों की एक स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाकर थर्मल स्कैनिंग कराई गई। इसके बाद सभी का पंजीयन श्रम विभाग ने किया गया। थर्मल स्कैनिंग के दौरान जिन मजदूरों में कोरोना के लक्षण नहीं मिले, उन्हें 15 दिन का राशन देकर 21 दिन के लिए होम क्वारंटाइन कर दिया गया।

सदर तहसीलदार अरविन्द्र कुमार ने बताया की महाराष्ट्र से ट्रेन द्वारा लखनऊ पहुंचे 303 मजदूरों को 12 रोडवेज बसों से कन्नौज लाया गया है। इन सभी का थर्मल स्कैनिंग करा कर इनको क्वारंटाइन किया गया। वहीं, कन्नौज पहुंचे प्रवासी मजदूरों ने सरकार द्वारा किराया माफी को बात को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि लखनऊ से कन्नौज तक बसों का किराया लिया गया है। प्रति व्यक्ति 550 रुपए वसूले गए इतना ही नहीं, बच्चों का भी किराया लिया गया है। मजदूरों ने अपने टिकट दिखाते हुए किराया लिए जाने का विरोध भी जताया। 

टिकट 630 रु का, कीमत चुकाई 710 रुपए:

जौनपुर स्टेशन पहुंचे ज्यादातर यात्रियों बताया कि उनसे साबरमती से जौनपुर की यात्रा के लिए 710 रुपए लिए गए। इसमें से 60 रुपए रास्ते में खाना-पानी के लिए लिए थे, लेकिन 24 घंटे के सफर में उन्हें एक बार खिचड़ी और दो बोतल पानी ही दिया गया। ट्रेन का टिकट 630 रुपए का है, जबकि यात्रियों से 710 रुपए लिए गए। उन्हें यह बताया गया था कि बाकी पैसे से रास्ते में खाने की व्यवस्था होगी। हालांकि यात्रा की तमाम दुश्वारियों के बावजूद यात्रियों में इस बात का सुकून था कि वह अपने घर लौट रहे हैं।