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शुक्रवार 15-जून-18
वाराणसी के पाॅपुलर हाॅस्पिटल में मानवता हुई शर्मसार पैसे के भूखे डाॅक्टरों ने की निर्ममता की सारी हदें पार


गंदा है पर धंधा है!

पैसो की खातिर होता है यहां खून का सौदा

पाॅपुलर की पाॅपुलर्टी के हैं और भी कई राज?

वाराणसी। कहते हैं डॉक्टर धरती का भगवान होता है और ऐसा है भी। कई डॉक्टरों का न्यूनतम सेवा शुल्क शुल्क और मरीजों के प्रति सेवाभाव इन्हें धरती का भगवान बना देता है जो इस पेशे के गरिमा के आगे धनआगम को तुच्छ समझते हैं। तो कुछ ऐसे डॉक्टर भी हैं जो इसी काशी नगरी में रुपये बनाने के अंधे दौड़ में इस कदर अपना जमीर बेच चुके हैं कि इन्हें धरती का शैतान या इस्टेथोस्कोप(आला) धारी लुटेरा कहने में भी गुरेज नही है। जी हां बनारस का एक ऐसा हॉस्पिटल जहां लाचार परेशान मरीजों को इलाज के नाम पर जमकर लूटा जाता है। नाम है पॉपुलर हॉस्पिटल। वाराणसी के ककरमत्ता स्तिथ डॉ ए. के. कौशिक के इस हॉस्पिटल में आप ने अगर भूल से मामूली इलाज के लिए कदम भी रख दिया तो वह रोग भले ठीक हो न हो मगर अस्पताल का बिल देखकर जरूर आपको हार्ट अटैक आ जायेगा या माइग्रेन उभर जाएगा ।

यही नहीं इस हॉस्पिटल की कु-ख्याति इस कदर फ़ैली है कि जो भी यहां इलाज को आया दोबारा इसमें जाने के नाम से उसकी रूह कांप जाती है। अस्पताल प्रबन्धक डा० कौशिक पर रुपया कमाने की भूख इस कदर हावी हो गयी है कि मानवता को तार -तार करते हुए इनके अस्पताल में मरीज के परिजनों से एक यूनिट ब्लड का पांच हजार रूपये तक वसूला जाता है। अभी हाल में ही एक मरीज को एक यूनिट ब्लड की जरूरत थी उसके परिजन जब अस्पताल के ब्लड यूनिट में बात किये तो पहले कहा गया कि आप तीन हजार दे दीजिए। बिना ब्लड डोनेट किये आपको एक यूनिट ब्लड तीन हजार रुपये में दे दिया जाएगा। जब मरीज के परिजन पर्चा लेकर ब्लड लेने पहुँचे तो उनसे कहा गया कि पांच हजार रुपये से कम नही लिया जाएगा और आखिरकार मरीज के उस परिजन से पांच हजार रुपये ले भी लिया गया। आखिर मरता क्या न करता ।

कुछ दिन पूर्व भदैनी निवासी राम सृजन की हालत खराब होने पर उसके परिजनो ने उसे पॉपुलर अस्पताल में एडमिट कराया। चौथे दिन रामसृजन की इलाज के दौरान मौत हो गयी। इसके बाद अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ मृतक के परिजनों का कहना था कि 'अस्पताल की एक महिला कर्मचारी ने बिना किसी कारण मरीज को दवा देना रोक दिया जिसके चलते मरीज की मौत हो गयी।' परिजनों ने कहा कि हम शव ले जाने को तैयार थे बस इतना जानना चाहते थे कि आखिरकार दवा देना क्यों बंद किया गया। यही बात पूछने पर अस्पताल प्रबंधन ने हम लोगों के साथ दुव्र्यवहार किया। जब हम लोगों ने विरोध किया तो अस्पताल के लोगों ने मारपीट गाली गलौज की। हंगामे की सूचना पर पहुंचे मीडिया के लोगों को भी अस्पताल कर्मियों ने नही बख्सा। इसी बीच अस्पताल में हंगामे की सूचना पर पुलिस वहां पर पहुंच गयी और स्थिति को नियंत्रित किया।'

जब पापुलर के आई सी यू में हुई महिला से छेड़खानी
आम तौर पर छेड़खानी की घटना रोड गली मोहल्ले में सुने होंगे मगर जब हॉस्पिटल में ऐसी घटना हो तो कौन जाए ऐसे हॉस्पिटल में जब वहां के कर्मचारी ही छेड़छाड़ करने लगे। यह एक पुराना वाक्या है जब पॉपुलर हॉस्पिटल में भर्ती उल्टी दस्त से पीड़ित एक महिला को दवा देने के बाद के आई सी यू में शिफ्ट कर दिया गया। जहां मौका देख कर मरीज के साथ वार्ड ब्वाय छेड़छाड़ करने लगा उसी दरम्यान महिला को होश आ गया।जब महिला इस बात को अपने परिजनों को बताया तो हॉस्पिटल में परिजनों ने जमकर बवाल काटा और चक्का जाम किया था। इसके बाद भेलूपुर थाने में वार्ड बॉय सुनील के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज भी दर्ज हुआ था। जब मामूली इलाज का विदेशी दम्पत्ति को थमाया पचास हजार का बिल

भारत देश की परंपरा रही है कि अथिति देवो भव : मगर जब उद्देश्य सिर्फ लूटना ही हो तो क्या देशी क्या विदेशी। पॉपुलर हॉस्पिटल ने उस वक्त अच्छे अच्छे गुंडों को वसूली में पीछे छोड़ दिया। जब बीते माह मार्च में फूड प्वाइजनिंग की शिकार विदेशी महिला के इलाज का बिल अस्पताल ने पांच दस नहीं बल्कि ५० हजार बनाया और हिसाब मांगने पर अस्पताल प्रबंधक के गुंडे सरेराह विदेशी पर्यटक से बदसलू की करने लगे और जबरन उससे पैसे जमा करने का दबाव बनाने लगे। अस्पताल की गुंडागर्दी से हतप्रभ विदेशी दम्पत्ति ने इसकी जानकारी भेलूपुर थाने दी। थाने में शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधक इस पूरे मामले अनभिज्ञ बनते रहे विदेशी पर्यटक की माने तो अस्पताल प्रबंधक ने इलाज से पहले उसका बिल १० हजार बताया था लेकिन इलाज के बाद उसे ५० हजार का बिल थमा दिया। उसके बाद वसूली के लिए गुंडागर्दी करने लगे। यहां चलता है लूट सको तो लूट लो ऑफर

सूत्रों के अनुसार लूट सको तो लूट लो ऑफर के तहत इसके कुछ एजेंट दूर दराज के इलाकों बलिया से लेकर बिहार तक फैले हुए हैं जो बीस से तीस प्रतिशत कमीशन के लालच में भोले-भाले लोगों को बेहतर इलाज और कम खर्च का भरोसा दिलाकर इसी पॉपुलर हॉस्पिटल तक लाते हैं और मरीजों के परिजनों की जेब कटवाते हैं। बहरहाल कुल मिलाकर यह एक अति गम्भीर मामला है जिसकी ज ड़ में पैसो की भूख के सिवा कुछ भी नहीं। आश्चर्य इस बात पर होता है कि बनारस शहर में यह सब खुले आम हो रहा है जिसपर शासन-प्रशासन की चुप्पी पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करता है।

विनय मौर्य की रिपोर्ट