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Saturday, April 02, 2016
्रसावधान: ठगी का एक और हथकंडा महिलाओं को बनाया जा रहा है शिकार

‘‘हैलो, क्या आप वाराणसी से बोल रही है? आपका ‘सेलेक्शन’ हो गया है। आपका दस हजार रूपया सरकार की तरफ से जमा हो गया है। आप सिर्फ ३५००/- रूपये जमा करा दें। आप बैंक पहुँचकर फोन करिये, जो एकाउन्ट नं. आपको बताया जायेगा, उसी में पैसा जमा करा दीजिये।’



     दरअसल पिछले दिनों वाराणसी से प्रकाशित एक समाचार पत्र में ४ फरवरी के अंक में भारत सरकार की स्वर्ण जयन्ती रोजगार योजना के अन्तर्गत नौकरी पाने का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। जिसे देखकर अशोक नेने की पत्नी श्रीमती श्रुति नेने ने विज्ञापन में छपे नं. ९९७१७९११८७ पर मैसेज भेजा। मैसेज में आवेदन करने वाले को अपना नाम, पता और पिन कोड नं. देना था। मैसेज भेजने के करीब एक हफ्ते बाद मोबाइल नं. ८८२६५०४५२४ से एक महिला ने फोन किया और फोन पर इंटरव्यू लेने लगी। आपके प्रधानमंत्री कौन? राष्ट्रपति कौन है? वंदेमातरम किसने लिखा है? जन-गण-मन किसने लिखा है? इन आसान से सवालों का चुटकी में जवाब देते हुये श्रीमति श्रुति नेने पूâली नहीं समा रही थी। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब एक हफ्ते बाद भारत सरकार की स्वर्ण जयन्ती रोजगार योजना का नियुक्ति पत्र डाक द्वारा उनके घर के पते पर पहुँचा। छ: पन्ने के इस नियुक्ति पत्र में नौकरी ज्वाइनिंग की तिथि ८ मार्च २०१६ अंकित है और २०५६ तक की नियुक्ति का उल्लेख है।

     नियुक्ति पत्र में इस बात की सूचना का उल्लेख है कि उम्मीदवार को भारत सरकार के स्वर्ण जयन्ती रोजगार योजना के अन्तर्गत ग्राहक सेवा प्रतिनिधि के पद पर नियुक्त किया गया है। जिसका वेतन बत्तीस हजार पाँच सौ रूपये सभी भत्तो सहित निर्धारित है। नियुक्ति पत्र में भारत सरकार की स्वर्ण जयन्ती रोजगार योजना का परिचय देते हुये बताया गया है कि पूरे भारत में २५३७६ ग्राहक सेवा प्रतिनिधि की नियुक्ति की जायेगी, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश में १२१२ ग्राहक सेवा प्रतिनिधि नियुक्त किये जायेंगे। उम्मीदवारों को प्रलोभन देने के उद्देश्य से नियुक्ति पत्र में इस बात का उल्लेख भी है कि ग्राहक सेवा प्रतिनिधि की नौकरी मिलने के बाद उम्मीदवारों को लैपटाप, मोबाइल फोन सहित सभी सुविधाएं प्रदान की जायेगी।।

     नियुक्ति पत्र में चयनित उम्मीदवारों को १४ दिन के प्रशिक्षण के उपरान्त भारत सरकार द्वारा आई.डी. कार्ड और रहने खाने का भत्ता भी दिये जाने का प्रमुखता के साथ उल्लेख किया गया है।।

     नियुक्ति पत्र में उम्मीदवार को १३,८५० रूपये सिक्योरिटी राशि के रूप में पंजाब नेशनल बैंक व भारतीय स्टेट बैंक में विभाग के सचिव के नाम से जमा करने का निर्देश दिया गया है। नियुक्ति पत्र में विशेष रूप से हाईलाइट करके मोबाइल नं०- ८४४७०३८४४५ का उल्लेख है। जिसके बारे में निर्देश दिया गया है कि सिक्योरिटी राशि लेटर मिलने के २४ घंटे के अंदर उम्मीदवार को दिये गये मोबाइल नं० पर फोन करके जो एकाउंट नं० बताया जायेगा, उसमें जमा करना है। सिक्योरिटी राशि जमा कर पाने में असमर्थ उम्मीदवारों का आवेदन तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा। विभाग को डी.डी. या चेक चालान स्वीकार नही होते हैं बल्कि सिर्फ नगद पैसा जमा करना होता है। नियुक्ति पत्र में लिखे सभी निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद रतनफाटक निवासी श्री अशोक नेने ने पैसा जमा कराने का मन बना लिया। लेकिन पता नहीं श्री नेने को ऐसा लग रहा था कि इतनी आसानी से भारत सरकार की नौकरी मिलने में कहीं ना कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है। आये दिन अखबारों में प्रकाशित फर्जीवाड़ा की खबरें उनके जेहन में घूम रही थी। इसी बीच वहाँ से फिर एक बार कॉल आयी कि आप कब तक पैसा जमा कर रहे है? ।

     इस पर श्री नेने ने सेकेण्ड शटरडे का हवाला देते हुये बैंक खुलने पर सोमवार को पैसा जमा करने की बात कही। फोन करने वाले ने एक बार फिर अपना निर्देश दोहराया कि आप बैंक पहुँचकर नियुक्ति पत्र में दिये गये नम्बर में कॉल करियेगा तभी आपको एकाउंट नं० दिया जायेगा। इसके बाद फोन कॉल कट गयी।।

     श्री नेन अभी सोच-विचार में लगे हुये थे कि कुछ दिन बाद फिर फोन की घंटी घनघना उठी। काल करने वाले ने कहा कि आपके दस हजार रूपये सरकार द्वारा जमा कर दिये गये हैं। अब आपको सिर्फ ३५००/- रूपया ही जमा करना है। बार-बार फोन आने से झुंझलाये श्री नेने ने फोन करने वाले से सा़फ शब्दों में कह दिया कि सरकारी नौकरी में तो डी.डी. या चेक से ही राशि जमा करनी होती है फिर आप नगद रूपया एकाउंट नं. में जमा कराने की बात क्यों कर रहे है, क्या भारत सरकार की नौकरी सिर्फ ३५००/- रूपये में मिलती है? इस पर फोन करने वाले ने हड़बड़ाकर फोन काट दिया। श्री नेने को अब पक्का विश्वास हो चुका था कि वो किसी बड़े फर्जीवाड़ा का शिकार होने जा रहे थे। लेकिन उनके अनुभव ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। उसके बाद से लगातार श्री नेने उस मोबाईल नं. पर कॉल कर रहे है, लेकिन दूसरी तरफ से फोन उठ नही रहा है। शायद ‘पार्टी’ एलर्ट हो गयी है।।

      ‘गूंज उठी रणभेरी’ ने जब इस पूरे मामले की पड़ताल करने के उद्देश्य से फार्म पर दिये वेबसाइट को सर्च किया तो सर्च करने पर ऐसी कोई वेबसाइट ही नही मिली। ‘रणभेरी’ ने दिल्ली में अपने सूत्रों के माध्यम से नियुक्ति पत्र पर दिये गये पते ए.--२२०, जनकपुरी शापिंग काम्प्लेक्स, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, जनकपुरी, नई दिल्ली-११००५८ की पड़ताल की तो वहाँ भारत सरकार का ऐसा कोई आफिस नहीं मिला।।

     विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि देश के नामचीन अखबारों में सरकारी योजनाओं में नौकरी दिलाने के नाम पर धड़ल्ले से विज्ञापन प्रकाशित कराये जा रहे हैं और लोगों को सिक्योरिटी राशि जमा कराने के नाम पर ठगा जा रहा है। इस तरह के विज्ञापन अखबारों में किस आधार पर प्रकाशित कराये जा रहे है यह रहस्य का विषय है। पूरे देश की जनता फर्जीवाड़ा का शिकार हो रही है लेकिन इस पर अंकुश लगाने के लिये कहीं से कोई सुगबुगाहट नहीं है। सरकारी मिशनरियों को ऐसे फर्जीवाड़ा को रोकने के लिये विशेष अभियान चलाना चाहिये तभी निरीह और भोली भाली जनता लूटने से बच पायेगी।।