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Saturday, April 02, 2016
प्रियंका गांधी को कमान !

PM का UP प्लान



     बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी की और बिहार विधान सभा चुनाव में लालू-नीतीश की नैया पार कराने वाले प्रशांत किशोर को कांग्रेस की जीत का प्लान करने की जिम्मेदारी दिए हुए लगभग एक महीना हो गया है। और अब अनुमान लगाया जा रहा है कि ४०० करोड़ रुपए का कैंपेन बजट, योजना बनाने के लिए ५०० लोगों की टीम का गठन, राहुल गांधी द्वारा २०० रैलियां, प्रियंका गांधी वाड्रा की मुख्य भूमिका और बिहार जैसे महा गठबंधन को दोहराना- जैसे प्लान के साथ प्रशांत किशोर ४०३ विधान सभी सीटों वाली यूपी में कांग्रेस को लाने की तैयारी में जुटे है।

     एक अंग्रेजी वेबसाइट ने कांग्रेस के नेताओं से जानना चाहा कि यूपी में विधान सभा चुनाव को लेकर आखिर किशोर का क्या प्लान रहेगा? पता चला कि प्रशांत किशोर का ये तर्क है कि अमेठी और रायबरेली में प्रियंका गांधी का राहुल गांधी को सपोर्ट करना काफी नहीं होगा। प्रियंका गांधी के हाथों में उत्तर प्रदेश की कमान सौंप दी जाए तो वो गेम चेंजर के तौर पर उभर कर सामने आ सकती हैं। लेकिन वो इतना आसान भी नहीं होगा। कांग्रेस ने यूपी २०१२ चुनाव में केवल २८ सीटों पर जीत हासिल की थी। सपा, बसपा और भाजपा के बाद कांग्रेस चौथे नंबर पर रही थी। बावजूद इसके कि उस वक्त राहुल गांधी ने पार्टी कैंपेन में पूरा जोर लगा दिया था।

     किशोर का ये मानना है कि ‘प्रियंका गांधी को उत्प्रेरक का किरदार निभाना चाहिए।लेकिन वास्तव में उन्हें क्या रोल देना चाहिए और कब उसे भुनाना चाहिए यह भी एक अहम् सवाल है। क्या पार्टी इस स्टेज पर उनका इस्तेमाल कर सकती है। हमें १०० प्रतिशत तक भरोसा चाहिए कि अगर प्रियंका चुनाव मैदान में उतरती हैं तो उससे १०० से ऊपर की सीट हमें मिलेंगी और हम यूपी में सरकार बनाएंगे ही।’

     सूत्रों के अनुसार किशोर कांग्रेस की सदस्य और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर भी दांव खेल सकते हैं। शीला खत्री हैं और उन्होंने एक ब्राह्मण से शादी की थी। खत्री और ब्राह्मण का ये गणित यूपी की राजनीति में काम आ सकता है। किशोर और शीला की मुलाकात हो चुकी है और दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर उनका रिकॉर्ड कारगर साबित हो सकता है। लेकिन सवाल ये भी है कि इस पूर्व सीएम की उम्र और यूपी में उनका तजुर्बा कितना मदद करेगा उन्हें यूपी सीएम की दावेदारी के लिए।

     किशोर ने ये भी माना है कांग्रेस क्षेत्र के अनुसार स्लोगन्स तैयार करेगी। यूपी और दिल्ली के बाहर भी पार्टी का कैंपेन रहेगा। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि किशोर इसके लिए करीब ५०० लोगों की टीम तैयार कर रहे हैं। हालांकि वो कांग्रेस की संचार और सोशल मीडिया टीम से खुश नहीं हैं। वहीं सोशल मीडिया पर कांग्रेस के फॉलोवर्स बीजेपी और कांग्रेस से काफी कम है। आइपीएस की टीम इस पर काम करेगी और कांग्रेस के पुराने तरीके को बदलकर नई सोच के साथ आगे बढ़ेगी। किशोर की शुरुआत अच्छी रही है, लेकिन पार्टी के पुराने नेता जैसे उत्तर प्रदेश के प्रभारी और कांग्रेस महासचिव मधुसुदन मिस्त्री और राज्य इकाई के अध्यक्ष निर्मल खत्री से ज्यादा पार्टी के छोटे, पर अहम नेताओं से उनका तालमेल ज्यादा रहा है। लेकिन पार्टी के उन नेताओं को भी खुश रखना किशोर की जिम्मेदारी हैं। खत्री और मिस्त्री के अलावा पार्टी के सभी लोग प्रशांत के विचारों से सहमत हैं और वो सब यही चाहते हैं कि यूपी में कांग्रेस का २५ साल का वनवास खत्म हो जाए। चाहे जो भी उनकी बातों से इत्तेफाक न रखता हो, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि नेहरू और गांधी परिवार के सदस्य किशोर पर विश्वास रखते हैं। राहुल और प्रियंका गांधी संग किशोर चुनाव के एक वर्ष पहले ही कमर कस चुके हैं और योजनाओं को जगह-जगह फ़ैलाने में जुट गए हैं, परिणाम चाहे कुछ भी हो।

     यूपी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी को लगता है कि उनकी पार्टी में अभी भी वह दम-खम है, जिसके बल पर वह राज्य में न सिर्फ दुबारा खड़ी हो सकती है, बल्कि राज्य में सरकार भी बना सकती है। रीता बहुगुणा जोशी ने बताया कि राज्य की सरकार पर भ्रष्टाचार और कुशासन के इतने गंभीर आरोप हैं कि वह जनता के निगाह से पूरी तरह उतर चुकी है। वहीं, बसपा अपने पूर्व के कार्यकाल में ठीक सपा जैसा व्यवहार कर रही थी और जनता ने उसे भी पूर्ण बहुमत देकर देख लिया है। उन्होंने भी यह कहा कि राहुल व प्रियंका यूपी में आगामी चुनाव के लिए प्रचार की कमान संभाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के सांप्रदायिक चरित्र पर यहां की जनता कभी विश्वास नहीं करती है, इसलिए आज के परिदृश्य में जनता के पास कांग्रेस का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही वह अकेली पार्टी है, जो देश के सभी धर्म-जाति और वर्गों को साथ लेकर चल सकती है। कांग्रेस पर लोग क्यों भरोसा करें के सवाल पर जोशी का कहना है कि विकास ही वह मुद्दा है, जो किसी भी जाति-वर्ग को आपस में जोड़कर रख सकता है। जिस गली-मोहल्ले में लोग रहते हैं, वहां वे एक जैसी समस्याओं का सामना करते हैं और जो दल उन्हें इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने की बात करेगा, लोग उससे आसानी से जुड़ सकते हैं। उनका यह भी कहना है कि उनकी पार्टी के पास राहुल व प्रियंका जैसे मजबूत युवा चेहरे हैं, जिससे युवा वर्ग खुद को जोड़कर देख पाता है और उनसे संवाद कर पाता है। इसलिए वे युवा वर्ग की पसंद हैं और वे आगामी चुनाव में जरूरत के अनुसार प्रियंका जी प्रचार की कमान संभालेंगी। चुनाव में प्रशांत किशोर की भूमिका के बारे में रीता बहुगुणा जोशी का कहना है कि आज चुनाव का दौर पूरी तरह बदल गया है। आज हर दल वैज्ञानिक तरीके से जनता, वोटर और क्षेत्र का वैज्ञानिक आकलन करता है। प्रशांत इसमें उनकी मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ चुनावी तौर तरीके बदल रहे हैं और इस बदलाव का स्वागत किया जाना चाहिए।