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शनिवार 14-जुलाई -18
..तो डिप्टी जेलर ‘अनिल त्यागी’ की हत्या बनी मुन्ना बजरंगी के मौत का कारण ! ..तो डिप्टी जेलर ‘अनिल त्यागी’ की हत्या बनी मुन्ना बजरंगी के मौत का कारण !





सुनील राठी से मुन्ना बजरंगी की नहीं थी कोई दुश्मनी

बजरंगी की हत्या की सा़जिश में प्रशासन की अहम भूमिका !

9 जुलाई 2017 को STF ने किया था खुलासा : मुन्ना बजरंगी ने ही कराई थी ‘त्यागी’ की हत्या

29 जून 2018 को सीमा सिंह ने कहा था : STF कराना चाहती है मुन्ना बजरंगी की हत्या

कहा जाता है पुलिस की दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही अच्छी नही होती। जी हां उत्तर प्रदेश में बागपत जेल की महपूâज दीवारों के पीछे गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच पूर्वांचल की धरती के कुख्यात माफिया मुन््नाा बजरंगी की हत्या ने इस कथन को सत्य साबित कर दिया। मुन््नाा बजरंगी की हत्या को लेकर भले ही हर तरफ अलग-अलग कयास लगाये जा रहे हो मगर सच तो यही है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या पुलिस एवं जेल प्रशासन की अभिरक्षा में ही हुई है। इस सनसनीखेज घटना ने देश भर के जेलों में बंद अपराधियों की नींद उड़ा दी है। मुन्ना बजरंगी की हत्या ने बड़े से बड़े माफियाआें को एहसास करा दिया है कि प्रशासन यदि चाह जाए तो बड़े से बड़े बाहुबलियों के भी बल को जमींदोज कर सकती है। बजरंगी की हत्या में कांटे से कांटा निकाला गया है। जेल के जेलर की मर्जी के बगैर जेलों में परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। ऐसे में बागपत जेल की तनहाई बैरक में पिस्टल और दर्जनों कारतूस का पहुंच जाना कई अनबूझे सवाल खड़ा कर रहा है।

बहरहाल सत्ता के गलियारों से लेकर जरायम की दुनिया में अब इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गयी है कि जब तक बजरंगी ने नेता,व्यापारी,गुण्डों की हत्या की और कराई तब तक तो पुलिस-प्रशासन ने कानून के दायरे में रहकर केवल अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। अपने २० वर्षों के आपराधिक जीवन में यूं तो मुन््नाा बजरंगी ने ४० के लगभग हत्या की थी लेकिन जब बात डिप्टी जेलर के हत्या की आयी तो पुलिस-प्रशासन की नजरे भी टेढ़ी हो गयी। यही वजह है कि जिस बजरंगी के नाम पर जेल के भीतर से लेकर बाहरी दुनिया के लोग तक थर्राते थें उसी बजरंगी को सबसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर घेरकर गोलियों से मारा गया। मुन््नाा बजरंगी के ऊपर मौत की तलवार उसी दिन से लटकने लगी थीं जिस दिन एसटीएफ ने इस बात का खुलासा किया कि डिप्टी जेलर की हत्या में बजरंगी का हाथ था। मुन्ना बजरंगी के लिए वाराणसी के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या की साजिश को अंजाम देना ही मौत का सबब बना। अनिल त्यागी वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर के पद पर रहते हुए २३ नवंबर २०१३ को गोलियों के शिकार हो गए थे। इस घटना के खुलासे में एसटीएफ ने यह साबित कर दिया था कि डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या मुन््नाा बजरंगी ने ही कराई थी। दरअसल अनिल त्यागी एक बेहद ही लोकप्रिय अधिकारी के रूप में जाने जाते थें अनिल त्यागी के व्यक्तिगत रिश्ते पुलिस अधिकारियों के बीच बड़े ही बेहतरीन हुआ करते थें यही कारण रहा है कि अनिल त्यागी की मौत से कहीं ना कहीं शासन-प्रशासन के लोग काफी नाराज चल रहे थें। बस सही मौके का इंतजार था। कुछ बड़े मास्टरमाइंड एवं सफेदपोशों की पूरी सहमति एवं बागपत जेल प्रशासन के सहयोग से प्रशासन के संरक्षण में ही यह साजिश रची गई। बाकायदा मुन््नाा बजरंगी को एक षड्यंत्र के तहत बागपत की जेल में ला कर रखा गया जहां सुबह आंख खुलते ही बजरंगी को घेरकर गोलियों से मार दिया गया। आज जरायम की दुनिया में मुन््नाा बजरंगी का नाम धुंधला हो गया मगर जरायम की दुनिया के लोगों के लिए मुन्ना बजरंगी की हत्या पर यह कहावत चरितार्थ हो गयी कि पुलिस की दोस्ती और पुलिस की दुश्मनी दोनों ही अच्छी नहीं होती। नि:संदेह अपराध जगत में यह माना जा रहा है कि डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या ही बनी मुन्ना बजरंगी के मौत का कारण ।

जरायम की दुनिया में पूर्वांचल की धरती पर ऐसा कोई नहीं था जो मुन्ना बजरंगी के नाम से वाकिफ न रहा हो। महज १७ साल की उम्र में ही अपराध की चौखट पर दस्तक देने वाले मुन्ना ने अस्सी के दशक में माफिया गजराज सिंह का दामन थामते ही पहली बार १९८४ में एक व्यापारी की हत्या के साथ ही खून का स्वाद चखा फिर गजराज सिंह के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या कर पूर्वांचल की धरती पर उसने अपने नाम का डंका बजा दिया। यहीं से शुरु हुआ ताबड़तोड़ हत्याओं का दौर। फिर अपनी साख को मजबूत करने के लिए ९० के दशक में मुन्ना से मुन्ना बजरंगी बन चुके इस अपराधी ने पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी की सरपरस्ती कबूल कर लिया। २० वर्षों के अपने अपराधिक जीवन में ४० हत्याआें के आरोपी मुन्ना बजरंगी ने अनिल राय,सुनील राय, छोटे सिंह, बड़े सिंह सहित सर्वाधिक सनसनीखेज विधायक कृष्णानंद राय हत्याकाण्ड के साथ जरायम की दुनिया की बादशाहत हासिल की थी। २९ नवम्बर २००५ को लखनऊ हाईवे पर विधायक कृष्णानंद राय समेत ७ लोगों पर एके-४७ से गोलियों की बौछार करके बजरंगी ने उत्तर प्रदेश की राजनैतिक गलियारों में सनसनी पैâला दी थी। यहीं से एक ऐसे दौर का आगाज हो गया जब मुन्ना बजरंगी के नाम से हर कोई खौफ खाने लगा।

भाजपा विधायक की हत्या समेत कई मामलों में पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी। उस पर सात लाख रूपये का इनाम भी घोषित कर दिया गया था। उसकी तलाश में लगी टीम ने २९ अक्टूबर २००९ को मुम्बई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया। उसी समय इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि मुन्ना ने खुद को गिरफ्तार करवाया क्योंकि उसे अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था। लेकिन सूत्र बताते हैं कि एक अण्डरवल्र्ड डॉन के शरण में चले जाने के कारण ही मुन्ना बजरंगी को मुम्बई के मलाड से जिंदा लाया गया।

बनारस जेल में हुआ था अपमानित

२००९ से अब तक दिल्ली के तिहाड़ सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न जेलों की यात्रा के दौरान सर्वाधिक अपमान का एहसास मुन्ना बजरंगी ने वाराणसी के जिला जिला कारागार में हुआ था। साल २०१० में जब मुन््नाा बजरंगी वाराणसी जेल में बंद था तभी तत्कालीन डीएम रविन्द्र और डीआईजी डीके ठाकुर ने वाराणसी जिला जेल का इंस्पेक्शन किया था। उसने जेल की व्यवस्था और जेल में मिलने वाली रोटी को लेकर जेलर की शिकायत की थी जिसके कारण बजरंगी को तत्कालिन डेप्टी जेलर अनिल त्यागी के आक्रोश का सामना करना पड़ा था । इस घटना ने बजरंगी को काफी अपमानित होने का एहसास करा दिया था । तभी से बजरंगी के मन में अनिल त्यागी से अपमान का प्रतिशोध लेने की कसम ने जन्म ले लिया था।

2013 में रचा डिप्टी जेलर के हत्या की साजिश

इस घटना के कई महीने बीत जाने के बाद २३ नवम्बर २०१३ को आखिरकार मुन््नाा बजरंगी ने वाराणसी जेल के तेज तर्रार डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या कराकर अपने अपमान का हिसाब चुकता कर लिया। उस समय मुन््नाा बजरंगी सुल्तानपुर की जेल में बंद था। हालांकि इस घटना का खुलासा उस समय नही हो सका था। दर असल डिप्टी जेलर की हत्या की पटकथा बड़े ही शातिराना अंदाज में लिखी गई थी यही कारण था कि इस घटना के खुलासे के लिए वाराणसी पुलिस से लेकर लखनऊ क्राईम ब्रांच सहित एसटीएफ के तेज तर्रार अधिकारियों को भी सफलता नही मिल पायी थी। जिसे लेकर बड़ी किरकिरी भी हुई थी। इसी बीच घटना के ६ माह बीत जाने के बाद ७ मई २०१४ को तत्कालीन वैंâट थाना प्रभारी वीपिन राय ने बड़े ही नाटकीय अंदाज में मऊ के एक शातिर अपराधी रमेश सिंह काका के नाम के साथ वाराणसी के लगभग आधा दर्जन ऐसे लोगों का नाम जोड़कर त्यागी की हत्या का खुलासा दिखा दिया जिन लोगों का जरायम की दुनिया से कोई नाता ही नहीं था। इसी वजह से जहां इस खुलासे पर अनिल त्यागी की पत्नी अनुभा त्यागी सहित एसटीएफ ने असंतोष व्यक्त किया था वहीं अनिल त्यागी के करीबी रहे जेल अधिकारियों में भी खासी नाराजगी पनप रही थी।

एसटीएफ ने किया था बजरंगी के नाम का खुलासा

बहरहाल इस खुलासे के बावजूद पुलिस विभाग का एक धड़ा अनिल त्यागी के असली हत्यारों की खोज में लगा रहा और आखिरकार एसटीएफ के इंस्पेक्टर शैलेष प्रताप सिंह ने ९ जुलाई २०१७ को त्यागी हत्याकांड का पुन: खुलासा करते हुए साबित कर दिया कि मुन्ना बजरंगी ने कराई थी डिप्टी जेलर की हत्या। दर असल ८ जुलाई २०१७ को धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकाण्ड में वांछित शूटर बैरिया (बलिया) के मधुबनी निवासी चंदन सिंह उर्पâ रोहित को जब एसटीएफ ने वाराणसी से गिरफ्तार किया था। तभी चंदन सिंह ने एसटीएफ को बताया था कि २३ नवम्बर २०१३ को वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर की हत्या की साजिश रचने से लेकर वारदात को अंजाम देने तक में वह शामिल था। अनिल त्यागी ने जेल में मुन्ना बजरंगी पर पाबंदी लगा रखी थी, अपमानित भी किया था जिसके कारण वो त्यागी से नाराज थें। एसटीएफ के अनुसार मुन्ना बजरंगी ने चंदन सिंह, राजेश चौधरी, रिंवूâ सिंह, अमजद और वकील पाण्डेय को डिप्टी जेलर की हत्या का जिम्मा सौंपा था। इन्ही लोगों ने मुन्ना बजरंगी के कहने पर डिप्टी जेलर की हत्या की सनसनीखेज वारदात को बड़े ही शातिराना ढंग से अंजाम दिया था। बाद में राजेश चौधरी की अहरौरा के जंगल में फिल्मी कहानी वाली स्टाईल में हत्या हो गई। राजेश चौधरी की हत्या के समय भी दबी जुबान यह बात भी चर्चा में आयी थी कि डिप्टी जेलर के हत्या में शामिल होने की जानकारी होने पर 'पैâसला ऑन द स्पॉट' वाले स्टाईल में पुलिस ने ही रचा था राजेश चौधरी के लिए चक्रव्यूह और उसे अहरौरा के सुनसान जंगल में लेजाकर मौत के घाट उतारा गया था।

खटकने लगा था मुन्ना बजरंगी

चर्चा तो यह भी है कि डिप्टी जेलर की हत्या में शामिल वास्तविक अपराधियों का अंजाम एसटीएफ तय कर चुकी है! हालांकि अब आने वाला वक्त ही बताएगा कि किसका क्या अंजाम होना है। इस प्रकरण में एसटीएफ द्वारा बनाये गये आरोपी रिंवूâ, अमजद और वकील पाण्डेय अन्य मामलों में जेल हैं। सूत्रों की मानें तो तभी से पुलिस महकमें के कुछ तेज तर्रार अफसरों सहित प्रदेश भर के जेल अधिकारियों की नजर में खटकने लगा था मुन्ना बजरंगी। वाराणसी जेल के तत्कालीन जेल अधिकारियों सहित अनिल त्यागी के साथ काम कर चुके जेल अधिकारियों को भी इस बाद का बेहद दु:ख था कि त्यागी के असली कातिल को सजा नहीं मिली।
ऐसे में बागपत जेल के अंदर मुन्ना बजरंगी की ताबड़ तोड़ गोलियों से हुई हत्या इस ओर इशारा कर रही है कि जेल की सख्त दीवारों के बीच पूर्वांचल की आपराधिक दुनिया के बादशाह की मौत डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या का ही अंजाम है!

जेलर की मर्जी के बगैर जेल में कोई परिंदा भी पर नह मार सकता

इस सच्चाई को नजर अंदाज नही किया जा सकता कि देश भर के किसी भी जेल में जेलर की मर्जी के बगैर कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता। तो भला योगी राज में बागपत जेल के अंदर कुख्यात बजरंगी की हत्या के लिए वैâसे पहुंची पिस्तल? बजरंगी को एक दो नहीं बल्कि १० गोलियां मारी गयी जिससे यह साबित होता है कि इस वारदात के पीछे बजरंगी और सुनील राठी के बीच तत्कालीक उपजा विवाद कोई कारण नहीं है बल्कि यह तो पहले से हत्या की पूâल प्रूफ तैयारी का अंजाम है। जो कि जेल प्रशासन के पूर्ण सहयोग से ही सम्भव हो सकता है।

ब्रजेश सिंह था मुन्ना बजंरगी का सबसे बड़ा दुश्मन, फिर सुनील राठी ने क्यों मारा?

बागपत जेल में मारे गये कुख्यात बदमाश मुन््नाा बजरंगी को सबसे बड़ा खतरा डॉन बृजेश सिंह से था। बृजेश सिंह इस समय बनारस जेल में बंद है। मुन््नाा बजरंगी मुख्तार अंसारी के लिए काम करता था। बृजेश सिंह को भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उड़ीसा से गिरफ्तार कर उस पर मकोका लगाया था। बृजेश सिंह का सगा भतीजा सुशील सिंह यूपी में बीजेपी से विधायक है। उसको वाई प्लस सिक्योरिटी मिली हुई है। सुशील सिंह ने कहा था कि मुन््नाा बजरंगी और मुख्तार उसकी हत्या करवा सकते हैं।

सुनील से मुन्ना की नही थी कोई दुश्मनी

अब मुन््नाा बजरंगी हत्याकांड के तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिस डॉन सुनील राठी से जोड़ा जा रहा है वह भी कई मामलों में जेल में बंद है। अभी तक इस बात का कोई सुराग नहीं मिल पाया है कि मुन््नाा बजरंगी को मारने में सुनील राठी का नाम क्यों सामने आ रहा है? क्योंकि दोनों का आपस में दूर-दूर तक किसी भी मामले में संबंध नहीं रहा है। वहीं कुछ दिन पहले ही मुन््नाा बजरंगी की पत््नाी सीमा सिंह ने सीएम योगी से मिलकर मुन््नाा बजरंगी की हत्या की आशंका जताई थी। वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि जेल के अंदर पिस्तौल कैसे पहुंची है। एक दिन पहले ही मुन््नाा बजरंगी को बागपत जेल लाया गया था। क्या उसको मारने की साजिश में प्रशासन और बड़े लोगों का भी हाथ है।

बदल रही है कहानी

गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच हुई मुन्ना बजरंगी की हत्या की जो कहानी सामने आ रही है वह भी संदेह के घेरे में है। सबसे पहले जेल प्रशासन के हवाले से यह बताया गया कि सुबह छ: बजे मुन्ना बजरंगी व सुनील राठी समेत करीब आधा दर्जन कुख्यात बदमाश तनहाई बैरक के पिछले हिस्से में लगे हैंडपम्प के पास प्लास्टिक के स्टूलों पर बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे। जहां बजरंगी और सुनील राठी के बीच कहासुनी हुई थी। सुनील राठी के अनुसार उसने बजरंगी को चाय पीने का ऑफर किया तो वह भड़क गया और पिस्टल मुझपर तान दी, मैने पिस्टल छीनकर आत्मरक्षा में उसपर गोली चला दी। वहीं उसी दिन देर रात जब सुनील राठी को जिला मजिस्ट्रेट जेल में पेश किया गया, कोर्ट ने १४ दिन के रिमांड की मंजूरी दे दी इसके बाद एसपी जय प्रकाश सिंह ने सुनील राठी से देर तक पूछताछ की। बताया जा रहा है कि पूछताछ में राठी ने अपना जुर्म कबूल लिया। यहां राठी ने दूसरी कहानी बयां किया उसने कहा कि पहले दोनो के बीच कहासुनी हुई, बजरंगी ने उसे मोटा कह दिया था जिससे नाराज होकर राठी ने उसे गोलियों से भून दिया। यह बदलती कहानी पहली नजर में ही पूरे मामले को संदेह के फ्हेरे में खड़ी कर रही है। दो हार्ड कोर क्रिमिनल के बीच बचकाने कमेंट्स को लेकर गोलियों की तड़तड़ाहट की कहानी गले के नीचे नहीं उतर रही है।

कहां से आयी जेल में पिस्टल

बागपत जेल के अंदर जिस पिस्टल से मुन्ना बजरंगी पर गोलियां बरसायी गयी वह पिस्टल आखिरकार वैâसे पहुची जेल तक? यह सवाल ही इस पूरे प्रकरण को जेल प्रशासन की संदिग्ध भूमिका को दर्शाता है। इस घटना के बाद डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि मुन्ना मुन््नाा बजरंगी को झांसी जेल से बागपत जेल भेजने के दौरान प्रदेश पुलिस की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था में कोई कोताही नहीं बरती गयी। सिंह ने कहा, ''बजंरगी को सुरक्षा मुहैया कराये जाने में पुलिस की तरफ से कोई चूक नहीं हुई है।'' डीजीपी ने कहा कि झांसी से बागपत तक बजरंगी को ले जाने में करीब १२ घंटे का समय लगा था और इस दौरान पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का घेरा उसके इर्दगिर्द था। उसे सुरक्षित बागपत जेल पहुंचा दिया गया था। डीजीपी के इस बयान से यह साबित होता है कि झांसी से बागपत जेल पहुचने तक मुन्ना बजरंगी के खुद के पास कोई पिस्टल नहीं थी।
ऐसे में राठी का यह कहना कि बजरंगी ने उसपर पिस्टल तानी थी जिसे आत्मरक्षार्थ छीनकर राठी ने बजरंगी पर ही गोलियां चला दी, साबित करता है कि राठी की यह कहानी सरासर झूठ है

मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने केंद्रीय मंत्री पर लगाया हत्या करवाने का आरोप

माफिया डॉन मुन््नाा बजरंगी की सोमवार को बागपत जिला जेल में हत्या हो जाने के बाद उसकी पत््नाी सीमा सिंह ने केंद्रीय रेलमंत्री मनोज सिन्हा और पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत कई बड़े नेताओं पर उसके पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। करीब १० दिन पहले भी सीमा ने एसटीएफ पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया था। सीमा सिंह का कहना है कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ ही केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा और पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की पत््नाी और बीजेपी विधायक अलका राय ने कई लोगों के साथ मिलकर उसके पति की हत्या की साजिश रची थी। पहले भी मुन््नाा की पत््नाी ने एसटीएफ पर मुठभेड़ का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि जेल में बंद सुनील राठी को किसी ने सुपारी दी या नहीं, इसकी जानकारी उसे नहीं है।

बताते चलें कि मुख्तार अंसारी के करीबी माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की सोमवार सुबह बागपत जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मुन््नाा को रविवार को झांसी जेल से बागपत जेलमें शिफ्ट किया गया था। बसपा के पूर्व विधायक लोकश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में मुन््नाा की सोमवार को कोर्ट में पेशी थी। इससे पहले उसे गोली मार दी गई।
इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बजरंगी की हत्या सुनील राठी ने सोमवार सुबह की थी। इस मामले में प्रशासनिक ने कार्रवाई करते हुए जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, हेड वार्डन अरजिंदर सिंह, वार्डन माधव कुमार को निलंबित कर दिया गया है। न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं।

विनय मौर्य की रिपोर्ट