गुरुवार ,22-जून -19

मोदी जी,एक देश एक चुनाव तो एक देश एक शिक्षा, चिकित्सा, एक जाति क्यों नहीं..?



मोदी जी,एक देश एक चुनाव तो एक देश एक शिक्षा,  चिकित्सा,  एक जाति क्यों नहीं..?

जब किसी के पास शक्तियों सुविधाओं का भंडारण जो जाता है तो वह अपने जीवन के कई पुराने व पारम्परिक तरीकों में बदलाव करता है,भले ही वो सफल या असफल हो।


देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक प्रयोगधर्मी राजनेता हैं,वो लीक से हटकर कुछ ऐसा करते रहे हैं कि जनता की बात छोड़िये उनके पार्टी के लोग ही उनके कई निर्णयों पर चौंक जाते हैं। कारण यह है कि अब उनके ऊपर कोई ऐसा शीर्षस्थ व्यक्ति नहीं है जो उनसे उनके निर्णयों पर सवाल करने का साहस करता हो,और सत्ता भी पूर्णबहुमत से मिलती आ रही है,तो सहयोगी दल वैसे भी पूरे कार्यकाल शरणम गच्छामि त्राहिमाम त्राहिमाम मंत्र का जाप करते बिता देते हैं। यही कारण रहा कि पिछले कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ प्रयोग करते हुये उन्होंने नोटबन्दी योजना लागू की जो अर्थव्यवस्था और आमजनता के लिए कितना 'फायदेमंद' रहा यह मत पूछिए। नहीं नहीं नोटबन्दी पर एटीएम की कतारों में लाठी खाये जान गवांए लोगों और धड़ाम हो चुके अन्य कारोबार सहित रियल स्टेट कारोबारियों से रायशुमारी नहीं कि जाएगी।

खैर प्रयोगधर्मी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसके बाद कई निर्णयों जैसे मुरलीमनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी,सुषमा स्वराज को राजनीति से किनारे कर जनता को चौंका दियें थें।अभी कई वरिष्ठ नामों के बीच लोकसभा स्पीकर का पद दो बार के सांसद ओम बिड़ला को दिया जाना भी एक प्रयोग ही है।

प्रयोगधर्मी प्रधानमंत्री अब 'एक देश एक चुनाव' यानी पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने के लिए सभी दलों का समर्थन जुटा रहे हैं,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि

अगर लोकसभा और देश के हर विधानसभा का चुनाव एक साथ होगा तो इससे समय और पैसा तो बचेगा ही इससे प्रशासनिक सिस्टम को भी राहत मिलेगी। नरेंद्र मोदी का कहना है कि बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक काम पर भी असर पड़ता। मगर अन्य दल जो 'एक देश,एक चुनाव' के समर्थक नहीं हैं उनका कहना है कि अगर दोनों चुनाव एक साथ होंगे तो मतदाता केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी के लिए वोट कर देगा,और दूसरी बात की किसी कारण से किसी प्रदेश की विधानसभा भंग हो जाती है तो उसे चुनाव के लिए पूरे पांच साल इंतजार करना होगा।

सम्भव है कि आज नहीं तो कल इच्छाशक्ति के धनी नरेंद्र मोदी एक देश एक चुनाव लागू कराने सफल हो जायँ, मगर उन्हें राष्ट्रहित में एक देश एक शिक्षा व्यवस्था भी लागू करना चाहिए क्योंकि देश में शिक्षा के क्षेत्र तमाम असमानताएँ विसंगतियाँ हैं,आज सरकारी विद्यालयों का हाल देख लीजिए, जहां कमजोर वर्ग के बच्चे ही सरकारी विद्यालय में पढ़ने जाते हैं न कि आर्थिक रूप से संपन्न परिवार के बच्चे,आर्थिक रूप से संपन्न अभिभावक तो अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में कराते हैं और गरीब अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला सरकारी विद्यालयों में तो माना जा सकता है कि सरकारी विद्यालयों में किस ढंग की पढ़ाई होती है।

शिक्षा के साथ आमजन के लिए चिकित्सा क्षेत्र में भी 'एक देश, एक चिकित्सा' यानी सबको गरीब अमीर सबके लिए एक समान चिकित्सा की जरूरत है,क्योंकि देश में चिकित्सा के क्षेत्र में तो सबसे ज्यादा असमानताएं हैं,आम मध्यमवर्गीय गरीब नागरिक दो रोटी कम खाना चाहेगा मगर स्वयं और परजिनों का इलाज बेहतर कराना चाहता है,मगर सरकारी अस्पतालों की हालत किसी से छुपी नहीं है,वहां सब कुछ 'रामभरोसे' ही संचालित होता है,यही कारण है की सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के अभाव,अस्पताल कर्मियों की लापरवाही बेरुखी से प्रतिदिन हजारों मरीजों की असमय मौत हो जाती है, जबकि आर्थिक रूप से सम्पन्न अमीर व्यक्ति स्वयं और अपने परिजनों को प्राइवेट हॉस्पिटलों में मोटी रकम खर्च करके बेहतर इलाज पाता है, अगर एक देश एक चिकित्सा नीति लागू होगी तो पूरे देश के गरीब अमीर एक समान चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ एक समान दर पर लेंगे, इससे एक तो प्राइवेट हॉस्पिटलों की मनमानी रुकेगी दूसरे सरकारी हॉस्पिटल कर्मी भी ठीक ढंग से मरीज का इलाज करेंगे,क्योंकि कई सरकारी हॉस्पिटल कर्मी प्राइवेट हॉस्पिटल को लाभ पहूंचाने के चक्कर में मरीजों के साथ लापरवाही और परिजनों से बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।

और अंत में कहना यह है कि देश में छुआछूत भेदभाव अस्पृश्यता सदियों से चला आ रहा है,कारण वही वर्ण व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर पूरे देश में 'एक देश,एक जाति' यानी सबकी एक जाति वाली नीति लागू कर दें तो बेवजह की जातियों की लड़ाई खत्म हो जाये जातिगत वोट बैंक वाली पार्टी भी खत्म हो जाएंगी तेरी जाति छोटी मेरी जाति बड़ी वाली समस्या विलुप्त हो जाएगी सब एक समान हो जाएंगे किसी के ऊपर जातिगत टिप्पणी नही होगी,कोई भी व्यक्ति किसी के साथ वैवाहिक जीवन बिता सकेगा,इससे ऑनर किलिंग रुकेगा,और सबसे बड़ी बात एसी एसटी और जातिगत आरक्षण खत्म हो जायेगा।

अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'एक देश एक टैक्स' एक देश एक चुनाव के बारे में सोच सकते हैं तो'एक देश,एक शिक्षा' एक देश एक चिकित्सा' 'एक देश एक जाति' नीति लागू करने के बारे में प्रयास करना चाहिए तभी देश में असली विकास संभव है,वरना यह माना जा सकता है कि 'एक देश एक टैक्स' सरकारी लाभ के लिए और 'एक देश एक चुनाव' नीति पार्टी लाभ के लिए नरेंद्र मोदी प्रयास कर रहे हैंआम जनता के लाभ के लिए इनके पास सोचने का वक्त नही है।


अमित मौर्या की रिपोर्ट


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